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Showing posts from April 22, 2020

जीरो

एक ऐसा अंक जिसके आने पर अक्सर हम दुखी और निराश हो जाते हैं कि हमारे जीरो आ गए. भले फिर बात   हमारे मार्क्स की हो यहाँ हमारे सपने की जहाँ हम जीरों नहीं हीरो बनना चाहते हैं लेकिन ऐसा सोचते समय हम ये भूल जाते हैं कि जब हमारा जन्म होता है तब हम शून्य पर ही खड़े होते हैं. " आगे चलकर हमारी लड़ाई शून्य से शिखर पर जाने की होती है ".

धरती मेरी माता है

आज  विश्व पृथ्वी दिवस है मुमकिन है कि पहले की तरह ही सब कुछ ठीक हो जाऐगा हमने पृथ्वी को जितने भी कष्ट दिऐ है उन सब की अब भरपाई हो जाऐगी क्यों कि अब लॉक डाउन की समयावधि में लोगों के काम करने के तरीके बहुत बदल गए हैं.  जिसके परिणामस्वरूप अब एक फिर प्रकृति को अपने अनुसार जीवन जीने का मौका मिला है चारों तरफ पशु पक्षी सुख शांति से अपना जीवन बसेरा कर रहे हैं .  कोयल कूहु  कूहु करती है तो मोर नाचने  लगे. नदी का पानी पहले की तुलना में साफ हो गया है प्रदूषण की मात्रा पहले से कम हो गयी है वातावरण स्वच्छ  हो गया है एक बार फिर मौसम अपना जादू दिखाने लगा है नहीं तो पहले हम सब की हालात  बिल्कुल- " मेरे नैना सावन भादों फिर भी मेरा मन प्यासा" की तरह थी मौसम तो होता था अच्छा लेकिन कभी उसके लिए सोचने का वक्त ही नहीं मिला. अगर आज से भी हम गिनना शुरू करे कि आधुनिकता के कारण हमारी पृथ्वी कितनी चोटे खा रही तो शायद समय कम पड़ जाएगा. आज के समय मनुष्य की प्रवृत्ति बहुत लालची किस्म की हो गयी है जिसमें वो केवल अपना स्वार्थ देखता है ज...