जीरो




एक ऐसा अंक जिसके आने पर अक्सर हम दुखी और निराश हो जाते हैं कि हमारे जीरो आ गए.
भले फिर बात   हमारे मार्क्स की हो यहाँ हमारे सपने की जहाँ हम जीरों नहीं हीरो बनना चाहते हैं लेकिन ऐसा सोचते समय हम ये भूल जाते हैं कि जब हमारा जन्म होता है तब हम शून्य पर ही खड़े होते हैं.
" आगे चलकर हमारी लड़ाई शून्य से शिखर पर जाने की होती है ".


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