वो अल्फाज ही क्या जो दिल से न निकले हो वो दोस्त ही क्या जिसको आपकी कदर न हो। वो लोग ही क्या जिनमें संवेदना न हो। वो तरक्की ही क्या जिसमें अपनो का साथ न हो। वो शिकस्त ही क्या जिसके लिये खेद न हो।
वो बात जो जरूरी है