Skip to main content

Posts

Showing posts from May 11, 2020

एक समय था

 आज मालूम चलती है  घर से बाहर जाने की  कीमत  भले ही हम कितना भी थक जाएं पर हर दिन  कल के आने का इंतजार रहता था भले फिर किसी को    यूनिवर्सिटी जाने का  हो या    ऑफिस     जाने का लेकिन आज उस समय और घड़ी की बहुत याद आती है जिस अलार्म घड़ी को हम  कभी कोसते  थे कि कितने जल्दी बज गयी क्या सुबह हो गयी ? आज उसी अलार्म घड़ी को देखते हैं तो लगता है कि वो क्या दिन थे,कब आऐगे  वो दिन लौटकर? हमें हमेशा किसी भी चीज़ की कीमत तब ही मालूम चलती है जब हम उसने पाने में बहुत असमर्थ हो जाएं शायद इसलिए हमें कहा जाता है कि "आज में जिए अब को जिओं  कल किसने देखा." आज इस गाने की तरह ही हमारी जिंदगी हो चुकी है- ** जिंदगी के सफर गुजर जाते हैं, फिर नहीं आते हैं **