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Showing posts from April 22, 2021

पूछती है प्रश्न तुम से ?

जब तुम आए धरती  पर आदिमानव बनकर  क्या तुमने नही किया आविष्कार अग्नि का ?  जब लगी थी तुम्हें भूख तो  क्या नही किया था  सेवन  तुमने मांस मछी का ?  जब त्यास लगी थी तुम्हें तो क्या   तुमने नही खोदे थे कुएं  अपनी प्यास बुझाने के लिए?  जब तुम्हें न मिले थे घर तो क्या नहीं रहे थे तुम पेड़ के घर में?  जब नहीं था कोई दोस्त तो क्या नही की तुमने दोस्ती कुछ पशुओं से?  जब नहीं थी तुम्हें लालसा  ज्यादा धन की तो  क्या प्रकृति ने नहीं दिए थे उपहार  तुम्हारे जीवन को सुंदर बनाने के लिए?  आज जब तुम उड़ने लगे हो आसमान में तो क्या तुमने सुनी शिकायत  इस वसुंधरा की?  जिसने पाल पोस कर तुमको बड़ा किया तुमने तो केवल इसे चीरते हुए  हर दिन पहाड़ खत्म किया,  क्या पूछा दर्द तुमने उस वृक्ष का जिसे अर्चन समझकर तुमने दफना सा दिया क्या आज तुम नहीं कर सकते विचार की तुम करोगें अपनी आवश्यकता सीमित?  की कल को कोई और प्यासा न मरे क्या तुम नहीं कर सकते अपने  काम को समुचित?  ताकि प्रकृति को नया रास्ता मिले एक...