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पूछती है प्रश्न तुम से ?


जब तुम आए धरती

 पर आदिमानव बनकर 

क्या तुमने नही किया आविष्कार

अग्नि का ? 

जब लगी थी तुम्हें भूख तो 

क्या नही किया था 

सेवन  तुमने मांस मछी का ? 

जब त्यास लगी थी तुम्हें तो क्या 

 तुमने नही खोदे थे कुएं 

अपनी प्यास बुझाने के लिए? 

जब तुम्हें न मिले थे घर

तो क्या नहीं रहे थे तुम पेड़ के घर में? 

जब नहीं था कोई दोस्त तो

क्या नही की तुमने दोस्ती कुछ पशुओं से? 

जब नहीं थी तुम्हें लालसा 

ज्यादा धन की तो 

क्या प्रकृति ने नहीं दिए थे उपहार 

तुम्हारे जीवन को सुंदर बनाने के लिए? 

आज जब तुम उड़ने लगे हो आसमान में

तो क्या तुमने सुनी शिकायत 

इस वसुंधरा की? 

जिसने पाल पोस कर तुमको बड़ा किया

तुमने तो केवल इसे चीरते हुए 

हर दिन पहाड़ खत्म किया, 

क्या पूछा दर्द तुमने उस वृक्ष का

जिसे अर्चन समझकर तुमने दफना सा दिया

क्या आज तुम नहीं कर सकते विचार

की तुम करोगें अपनी

आवश्यकता सीमित? 

की कल को कोई और प्यासा न मरे

क्या तुम नहीं कर सकते अपने 

काम को समुचित? 

ताकि प्रकृति को नया रास्ता मिले

एक विचार करों तुम

उनका जो तुम्हे केवल जरूरत

 पर काम आते है 

वरना वो तुम्हारे घर पर केवल शो

 केस के लिए समते है

क्या नहीं लगा सकते तुम एक पेड़

 अपने घर के बाग के अलावा? 

क्या नहीं बचा सकते तुम

फिर धरती उजाड़ने से

जिसने तुम्हें अब तक है पाल 

क्या इस पृथ्वी दिवस पर 

तुम नहीं अपना सकते एक विचार

जो तुम्हारे साथ 

आने वाली पीढ़ी के लिए बने सहारा? 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..