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Showing posts from March 23, 2021

तुम नदी हो

  तुम नदी हो बहना तुम्हारा काम  जमाना क्या कहेगा तुम्हारे  बहने पर  ये फिक्र करना  गेरो का काम है कहने वाले तो हवा पर  भी प्रश्न करते हैं फिर तुम तो बहती नदी हो जिसका पानी आज यहाँ  तो कल वहाँ क्यों अपने वजूद को तुम खोजती दूसरे की चर्चाओं में तुम तो करो पहल  खुद के सपनों को पूरा करने में तुम हवा की मुस्कान पर खुश हो जाओं तुम जहाँ कि बातों पर मत जाओं दुनियादारी से नहीं लेन देना होता लहरों को तुम तो पानी की तरह  खुद के अस्तित्व को बनाने के लिए बह जाओं एक नयी शुरुआत करो तुम जीवन की तुम खुद को बनाने में लग जाओं जब चली हो अपना अस्तित्व बनने  तो फिर जरा से आधी तुफान से तुम मत डरा जाओं  करो़ एक नयी शुरुआत जीवन की  तुम तुम नदी हो एक बार फिर तुम पानी  में लहरों के साथ बह जाओं.