सच कहूं तो आज सच कहना मुश्किल हो गया जहां हर कोई किसी से किसी कारण जुड़ा है वहां सच कहना हद से ज्यादा मुश्किल हो गया है। जहां सवाल कम जवाब ज्यादा हो गए हैं पराये नहीं अब तो अपने भी कुछ मतलबी से हो गये हैं जहां शौक कम उम्मीद किसी को ज्यादा हो गयी है।
वो बात जो जरूरी है