कितना भी इंसान बेहतर चीज को पा ले किन्तु अगर उसके पास सुकून की कमी है ∣ तो वो उसके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है ∣ जिसे खोजने वो इंसान हर उस जगह जाता है ∣ जहाँ उसे लगता है कि वो सुकून पा सकता है पर अफ़सोस वो सिर्फ धोखा ही खाता है ∣ इस सुकून की खुदगर्जी में बहुत खूब लिखा है किसी शायर ने " तुम मुझें से मिलने आते हो पर अक्सर मुझ में नहीं खो पाते हो अक्सर जो इंसान ज्यादा हसमुख हो जाता है, वो सुकून के चक्कर में कही खो सा जाता है जिसे नहीं सुनाई देती एक बच्चे की चीख, तब भी तुम लोग हमें अपना बनाने के चक्कर में अक्सर खुद को ही भूल जाया करते हो और कहते हो सुकून की तलाश में है हम ∣
वो बात जो जरूरी है