राम के नाम की उपस्थिति राम जिसके शब्द की परिभाषा ही मर्यादा को बता देने वाली रही है जिसके कारण उसे मर्यादा 'पुरुषोत्तम राम 'भी कहते हैं आज से ही नहीं बल्कि भारत ने जब आजादी पायी थी तब से ही उसकी भारत में उपस्थिति रही है जब हिन्दी सिनेमा की शुरुआत हुई तब से ही राम के ऊपर कई गीत लिखे गए हैं जो आज पुराने भले हो गए हो लेकिन उनका महत्व आज भी उतना ही है जितना कि कल था जैसे - "राम चन्द्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा हंस चुगेगा दान दुनका ,कौव मोती खायेगा जिसके गाने में मुख्यता कलयुग मे आए परिवर्तन को बताया जा रहा है वैसे केवल गाने ही नहीं बल्कि दोहों से भी गीत बने है जैसे "मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदशरथ अचर बिहारी राम सिया राम सिया राम जय जय राम." वही दूसरी और जिंदगी की वास्तविक ता पर राम को जोड़कर गीत लिखे गए हैं **सुख के सब साथी दुख में न कोई मेरे राम, मेरे राम तेरा नाम एक सांचा दुजा ना कोई.** इसी कड़ी में अपने समय की सफल फिल्म ...
वो बात जो जरूरी है