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Showing posts from June 6, 2020

सृजन के मायने

एक अच्छा साहित्य वो ही माना जाता है जिसमें समाज की हर बुराई क़ो सामने रखा जाएं लेकिन अफ़सोस कुछ ही लेखक इसमें अपनी कलम चलते हैं जिसमें प्रेमचंद्र जिनका 'कफ़न' आज भी क्लासिकल है धर्मवीर भारती, निर्मला वर्मा, लेखिका  में कृष्ण सोबती जिनका उपन्यास में 'म रा जाणी ' है जो मुख्य रूप से महिला लेखन करती है .  कुछ  भारतीय  हिन्दी मूवी जिसमें मदर इंडिया, मर्दानी, राजी,  नीरजा, दंगल, जैसी  मूवी हमारे समाज को एक अलग दृष्टि देती है . वहीं इग्लिश मूवी में 'लिटिल गर्ल' जो हर किसी को देखनी चाहिए.  दूरदर्शन पर प्रसारित  सीरियल मैं बनू गी  मिस इंडिया, है. वही़ प्राईवेट चैनल में स्टार प्लस पर प्रसारित प्रतिज्ञा, कलर्स पर प्रसारित न आना इस देश मेरी लाडो, बालिका वधू जिसमें बाल विवाह जैसी समस्या पर प्रश्न उठाया  है. समकालीन समय में सृजन के अलग- अलग मायने हैं कोई सृजन अपने लिए करता है तो कोई किसी समस्या  को उठाने के लिए सृजन करता है .