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सृजन के मायने


एक अच्छा साहित्य वो ही माना जाता है जिसमें समाज की हर बुराई क़ो सामने रखा जाएं लेकिन अफ़सोस कुछ ही लेखक इसमें अपनी कलम चलते हैं जिसमें प्रेमचंद्र जिनका 'कफ़न' आज भी क्लासिकल है धर्मवीर भारती, निर्मला वर्मा, लेखिका  में कृष्ण सोबती जिनका उपन्यास में 'मरा जाणी ' है जो मुख्य रूप से महिला लेखन करती है . 

कुछ  भारतीय  हिन्दी मूवी जिसमें मदर इंडिया, मर्दानी, राजी,  नीरजा, दंगल, जैसी  मूवी हमारे समाज को एक अलग दृष्टि देती है .

वहीं इग्लिश मूवी में 'लिटिल गर्ल' जो हर किसी को देखनी चाहिए.

 दूरदर्शन पर प्रसारित  सीरियल मैं बनूगी  मिस इंडिया, है.

वही़ प्राईवेट चैनल में स्टार प्लस पर प्रसारित प्रतिज्ञा, कलर्स पर प्रसारित न आना इस देश मेरी लाडो, बालिका वधू जिसमें बाल विवाह जैसी समस्या पर प्रश्न उठाया  है.

समकालीन समय में सृजन के अलग- अलग मायने हैं कोई सृजन अपने लिए करता है तो कोई किसी समस्या  को उठाने के लिए सृजन करता है .




  

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..