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Showing posts from September 17, 2020

समय

एक समान फिर भी आज तक क्यों  किसी ने तेरे लिए परिभाषा न गढ़ी,  गीतों में संगीतों में तु आया हर रीतो में तु क्यों आज तक है किसी ने न गढ़ी हर किसी के पास होता है तु लेकिन फिर भी तेरी सुध किसी ने न ली  तु न हो तो जीवन क्या  तु न हो तो मृत्यु का,  तेरी कमी की शिकायत सब को है खली लेकिन तब भी तु शान्ति से अपने घर को चली घड़ी तेरे बंद होते ही न जाने कितने की  सांसें बढ़ी चढ़ी ,  समय तेरी खबर आज किसी ने न ली.