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Showing posts from December 14, 2023

तुम्हारी वो सोच है

मासिक धर्म हमारी कमजोरी नहीं तुम्हारी वो सोच है जो तुम्हें उसका नाम  लेने से भी रोकती है जिसको लेकर न ग्रामीण,  न शहरी सबकी सोच ‌ एक सी रहती है∣ कमजोर हम नहीं  तुम्हारी  वो सोच है जो गलती से भी लग जाएं  दाग उसका  तो न स्त्री न पुरुष सबकी वहीं सोच है।  जो बस न सड़क न घर न परिवार न रिश्तेदार न पड़ोसी न मित्र यार सब एक है।