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Showing posts from October 1, 2020

सुनो लो बेटी

  अगर तुम देखती हो ख्वाब  ऊंचाई पर चढ़ने की तो  कड़क कर लो अपने हाथ जिन हाथ में तुमने कभी चुड़ियाँ पहनी थी ,  उनमें अब तुम कड़क पना रख लो जिन पैर में कभी पायल पहनी थी  उनमें ऐसे चप्पल पहना लो जो तुम्हारी सुरक्षा कर सके क्योंकि आज न तुम्हारा  अपना न पराया कोई नहीं है  इतना विश्वास करने वाला,  अब वक्त आ गया है अपनी सुरक्षा करने का जिम्मा स्वयं लेने का  जागों मेरी नन्ही दुलारी बेटी

विचार

  १. संतोष होना भी जरूरी है क्योंकि इंसान को मिलता तो बहुत कुछ है किन्तु बहुत कम ही लोग होते हैं जिनको ये लगता है कि उन्होंने बहुत कुछ पा लिया है. २.हमेशा तुलना अपनी बराबरी से करनी चाहिए क्योंकि आसमान और धरती में बहुत अंतर है. ३. अच्छा दोस्त अगर मिला जाएं तो वो दुनिया जन्नत से कम नहीं. ४.आज को देखकर जीने का अपना ही आनंद है . ५. दिखावा करना किसी चीज का बहुत आसान है बजाय उसे अपने जीवन में उतरना. ६.दर्पण हर कोई रोज देखता है नहीं देख पाता तो वो खुद को .