किसी इंसान के जीवन के संघर्ष को समझने से बहुत आसान होता है ∣ कि उसे 'अद्वितीय' करार कर दिया जाएं। जिससे उनके जैसे बनना तो दूर, लोग उनकी तरह सोचने से भी पीछे हटे। ऐसा ही कुछ हमने 'स्वामी विवेकानंद' के साथ किया है ∣ जिनके विचारों को हम पढ़ते तो है ∣ परन्तु कभी ये नहीं सोचते हैं कि उन्होंने ये सब किया कैसे है? जहां आज 2023 के जमाने में हम किसी अंधविश्वासी इंसान से ये नहीं कह सकते हैं कि आप गलत सोच रहे हैं ∣ आप झूठ बोल रहे हैं। ऐसे में भला जब देश अंधविश्वासी लोगों से भरा था। तब स्वामी विवेकानंद ने किस तरह लोगों के बीच ज्ञान का दीप जलाया था। ये आज प्रश्न किया जाना जरूरी है? जहां हमें केवल उनके जीवन का एक पक्ष दिखाया जाता है कि वो किस तरह से नरेंद्रनाथ से स्वामी विवेकानंद हुए। पर उनके इस बीच की यात्रा को हम देखना ही भूल जाते हैं जहां स्वयं उनके देश वालों ने उनके साथ अन्याय किया। उनकी मदद करना दूर उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया। फिर भले आज वो लोग स्वामी विवेकानंद को भारतीय पुकारते है ∣ पर वास्तविकता तो यहीं हैं कि जब उन्हें हमारी जरूर...
वो बात जो जरूरी है