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Showing posts from June 24, 2023

Sunday thought

हम जब भी अपनी सीमा का निर्धारण करते हैं तब हम खुद को सीमित कर देते हैं।  कुछ सपने तब तक सच नहीं होते हैं जब तक हम उसे सच करने की कोशिश नहीं करते हैं।  कुछ लोग की खुशी कुछ पाना है तो कुछ की खुशी केवल श्रेष्ठ बनने में है।  समय की गति को हम नहीं रोक सकते किन्तु उस बीच कुछ ऐसा कर सकते हैं जो हमें कल से आज बेहतर बनाएं।  कुछ लोग बचपन से ही चालाकी करते हैं कुछ लोग चालाक होने का स्वांग रचते हैं दोनों ही खतरनाक होते हैं। खुश रहने का मतलब सबकुछ पाना नहीं कुछ हासिल करने के लिए की गयी मेहनत हैं।   

शब्दों की अपनी सीमा है

  प रिवर्तन संसार का नियम है जो कि होना ही चाहिए। किन्तु जब ये परिवर्तन की दिशा सही न हो तब ये बनी बनायी चीज‌ को बिगाड़ कर रख देता है ∣ इसके चलते ये कहना बड़ा ही लाजमी हो जाता है कि 'प्रकृति के साथ खिलवाड़ करना हमेशा गलत होता है ∣  कबीर के दोहों में शब्द की अपनी महिमा बतायी गयी है ∣ जिस तरह तीर से निकल बाण एक बार छूट जाने पर वापस नहीं लिया जा सकता है ∣ ठीक उसी तरह एक बार शब्द का प्रयोग कर देने पर उसे वापस नहीं लिया जाता है ∣ एक शब्द जहां व्यक्ति के घाव को भरा देता है ∣ वहीं दूसरी तरफ एक शब्द व्यक्ति को घाव कर देता है ∣ इसके चलते शब्दों का प्रयोग  बड़ी सावधानी से करना चाहिए ∣ आज के समय में जहां भाषा का स्तर को गिराता जा रहा है ∣ ऐसे समय में हम सब को उसके अस्तित्व को बचाएं रखने की कोशिश लगातार करना है ∣ कि वो ऐसी भाषा न बन जाएं जिसका अपना कोई अस्तित्व  ही शेष न‌ रहे।