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Showing posts from December 26, 2022

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले

जिंदगी और ख्वाहिश का एक अजीब सा नाता है ∣ जो एक दूसरे के बिना अधूरा है ∣  ख्वाहिश हर किसी की होती है कुछ बेहतर करने की , अपने सपनों को पंख देने की किन्तु इसे पूरा करने में कुछ ही सफल हो पाते हैं ∣  हर किसी को नहीं मिलती उनकी मंजिल केवल कुछ ही अपना नाम कमाने का दम रख पाते हैं ∣ मिर्जा गालिब की मशहूर गजल "हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले"  हमें अपनी ख्वाहिश पूरा करने की एक नयी वजह देती है ∣ आज के समय में आसान नहीं है खुद की ख्वाहिश को पूरा करना इसके बावजूद उसके साथ जीने की एक नयी उम्मीद देती है ∣