हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले

जिंदगी और ख्वाहिश का एक अजीब सा नाता है ∣ जो एक दूसरे के बिना अधूरा है ∣ 
ख्वाहिश हर किसी की होती है कुछ बेहतर करने की , अपने सपनों को पंख देने की किन्तु इसे पूरा करने में कुछ ही सफल हो पाते हैं ∣ 
हर किसी को नहीं मिलती उनकी मंजिल केवल कुछ ही अपना नाम कमाने का दम रख पाते हैं ∣
मिर्जा गालिब की मशहूर गजल "हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले"  हमें अपनी ख्वाहिश पूरा करने की एक नयी वजह देती है ∣ आज के समय में आसान नहीं है खुद की ख्वाहिश को पूरा करना इसके बावजूद उसके साथ जीने की एक नयी उम्मीद देती है ∣

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