युद्ध चाहे जिस वजह से शुरू हुआ पर उसका अंजाम बुरा ही होगा मारे जाएगें सिर्फ उसमें इंसान जहां बेकसूर बच्चों का कत्ल होगा बेबसी की जब सारी हदें पार हो जाएगी जब स्त्री के पास सुरक्षित कोई माहौल न होगा कांच वाले कमरे में बैठकर युद्ध की तस्वीर देखने वाले क्या जानें भूख से बिलखता जब कोई बच्चा अपनी माँ के पास जाएगा तब उस माँ का हाल क्या होगा? अनेक परेशानी का सामना करने वाले उस स्त्री का तब क्या होगा जब उसे मूलभूत चीजें भी नसीब न होगी सारी सुविधा होने के बाद भी कितना तनाव पूर्ण हो जाता है सामान्य स्त्री के लिए उस मासिकधर्म का दर्द सहना युद्ध की आहट के बीच उन महिलाओं की स्थिति का क्या होगा? कितने मारे जा रहे युद्ध में उनका हिसाब हम चाहे जितना रखा ले पर उन टूटे सपनों का क्या होगा जो इस युद्ध के साथ हर दिन दफन हो रहे हैं ∣ पक्ष विपक्ष की लड़ाई में अगर हम मानवता का मूल धर्म भूल जाएं ये तो गलत होगा।
वो बात जो जरूरी है