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Showing posts from March 17, 2020

इतिहास पढ़ने की जरूरत है

हमेशा क्या हमने ही सहने का ठेका सा ले लिया है कि हमारी गलती हो या न हो लेकिन हम ही सहे. मेरे आंखों देखी बहुत से उदाहरण रहे हैं जहाँ पर बेवजह ही हमें डट दिया जाता है जबकि हमारी कोई गलती ही नहीं रहती  जरा गौर कीजिये मेरी इस बात पर कि आप किसी बड़े प्रोग्राम में शिरकत करने गये हैं और वहाँ पर आपके किसी परिवार के व्यक्ति ने जो आपको कभी कुछ नहीं कहता उसने आपको डंटा दिया आपने लोगों के सामने उनका सम्मान रखने के लिए कोई बात नहीं कहीं लेकिन बाद में थोड़ा कुछ कह दिया तो आपको भला बुरा कह जाऐ तो उस समय आप क्या कहेंगे. हमेशा लोगों की बात सुना ही क्या हमारा काम रह गया है मैं ये नहीं कहती कि बात बात पर लड़की का गली देना सही है लेकिन उसका बिना गलती के सहना भी उतना ही गलत है हमें अपने लिए जगना होगा. सुना है फेमिनिज्म बहुत चर्चा में है आप सबको याद दिलाना चाहूगी कि भारत में ये बहुत पहले से ही है भले बात झांसी की रानी की हो, यहाँ रानी अवतिका बाई की हो इस देश में शुरू से ही फेमिनिज्म रहा है. हमारी पौराणिक कथाओं को ही देख ले जहाँ उन्हें युद्ध लड़ने से लेकर अपना मनपसंद वर चुनने की भी स्वतंत्रता...