जिंदगी को जीते जीते सीख ही जाते हम कोशिश हजार करने पर भी अक्सर मांगी चीज मिले ये जरूरी नहीं होता फिर भी हमें मेहनत करना जरूरी होता अक्सर वक्त जाय लगता हमें जिस काम को करने में अक्सर वही कभी कभी हमारी पहचान होता, समय समय में बदलती रहती हमारी सोच तो कुछ समय बाद अक्सर हमे खरे सोने की पहचान होती दुनिया में क ई चेहरे को देख एक समय चकाचौंध हो जैसे हमारी आंखें होती पर विपत्ति में जैसे हीरे की पहचान होती ∣ दोस्त तो बन जाता हर कोई पर दोस्ती निभाने वाले की हमारी जिंदगी में संख्या कम होती, जिंदगी के उतार चढ़ाव पार करते हुए हमारी क ई पसंद नापसंद में ऐसे होती मानों मौसम बदल रहा है क ई कहानी शुरू होती तो कुछ कहानी शुरू होने से पहले ही खत्म होती जिंदगी यहीं हैं जहां ढेरों व्यस्तता के बीच जब खुद को खोजने निकलते हम तब ही जैसे हम से हमारी पहचान होती ∣ ∣
वो बात जो जरूरी है