कुछ भी तब तक आसान कहां होता है जब तक हमारे अन्दर उसके लिए जुनून कम होता है ∣ एक कर सबकुछ पीछे छोड़ जब हम आगे बढ़ते हैं फिर उसे समेट कर रखना कहां आसान होता है ? जहां कोई जब हमें समझने वाला शेष नहीं होता है तब भी चलते जाना लगातार बढ़ते रहना अक्सर मुश्किल सा होता है । क ई बार सहनशीलता का घूंट पीकर भी चुप रहना होता है ∣ क्या आसान होता है उस दिशा में चलना जहां सिर्फ हमें परीक्षा देना होता है ∣
वो बात जो जरूरी है