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Showing posts from September 15, 2022

कुछ चीजें अक्सर हमारी सोच पर निर्भर करती है

पानी रोज की तरह शाम होते होते तेज हो रहा है ∣ बस में बैठे सभी लोग पानी को देख चिंतित हो रहे हैं कि अब घर कैसे जाएगें?  यहीं सोचते सोचते सब अपने घर को जाने के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार करने लगे, कि बस से उतरते ही  स्टाॅप पर पहुंचकर अपने घर के लोगों को फोन लगा देगें कि वो उन्हें लेने आ जाएं ∣  आज बस समय से रोज की तरह लेट पहुंची कुछ छाते के साथ किसी तरह से खुद को बरसात से बचाने की जगह खोज रहे हैं ∣ तो कुछ ऑटो में बैठने जा रहे है जिसमें अब सिर्फ एक सीट ही  खाली है ∣ इसके चलते वो अभी एक यात्री का इंतजार कर रहा है अगले यात्री के आते ही ऑटो चल दिया ओर बारिश भी तेज हो गयी ∣ कुछ लोग ऑटो में साइड में बैठने के कारण गीले हो गए हैं ∣ तभी एक मोड़ पर ऑटो रूक गया और कुछ यात्री वहां पर उतर गए बाकी सब ऑटो में बैठे हैं ∣  एक काॅलेज की ड्रेस पहनी लड़की छाता न लाने के कारण पूरी तरह से भीग गयी है ∣  लेकिन वो किसी भी तरह की प्रतिक्रिया न करते हुए शांति से ऑटो में बैठी है ∣ ऐसा लगा रहा है    जैसे अब उसे बारिश से कोई  तकलीफ नहीं हो रही है ∣ उसे ठंड  का को...