सब को चाहिए लड़की शरीफ़ ही लेकिन बात जब खुद की शराफ़त की तो मुंह बंद हो जाते हैं तु तड़के से लड़की बात करती दिख जाएं तो वो दुनिया की नजर में फालतू ही नजर आती है पर नजरें हमारी तब कहां होती है जब एक नादान सी लड़की बेगुनाह होकर भी कई तरह की परीक्षा झेलती है तब सवाल हम क्यों नहीं करते हैं। मौन हम तब क्यों रख लेते हैं जब बात हमारे हक की हो तब हम चुप्पी क्यों साध लेते हैं।
वो बात जो जरूरी है