' वाइट टाइगर ' एक बलराम हलवाई उर्फ की कहानी है ∣ जो एक चाकर, चिंतक से किस तरह एक हत्यारा बनता है ∣ सात रातों के बीच ये अपनी कहानी बताता है कि वो चाय की दुकान पर काम करने वाले से किस तरह देसी डाइवर आगे चलकर वाइट टाइगर बना ∣ जो गांव से निकलकर कहीं दूर जाना चाहत है अपने सपनों की उड़ान भरना चाहता है ∣ जो आगे चलकर एक ऐसे स्थान पर खड़ा होता है ∣ जहां एक तरफ कुंआ दूसरी तरफ खाई है ∣ इस उपन्यास को पढ़ने का कारण ये भी है जब हम इसके कुछ पन्नों को पढ़ते हैं ∣ तब उस डाइवर की कहानी के जरिए बहुत से ऐसे रहस्मयी किस्से सुनते हैं ∣ जो कहीं न कहीं हमारे देश का सच है जिसे हम केवल नजर अंदाज कर सकते हैं ∣ किन्तु हम कतई भी इसे झुठला नहीं सकते हैं ∣ जहां एक ओर इस उपन्यास में शहर की हवा का जिक्र किया गया है∣ वहीं गाँव की उस बदसूरती पर इस उपन्यास ने अपनी कलाम चलायी है ∣ जो कहीं न कहीं हमारे गाँव एक सच है ∣ अगर हम कुछ नया और सस्पेंस भर पढ़ने का सोच रहे है तो ये उपन्यास बहुत ही सही चयन होगा ∣
वो बात जो जरूरी है