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देसी से टाइगर बने डाइवर की कहानी को बताता है वाइट टाइगर उपन्यास


'वाइट टाइगर' एक बलराम हलवाई उर्फ की कहानी है ∣ जो एक चाकर, चिंतक से किस तरह एक हत्यारा बनता है ∣ सात रातों के बीच ये अपनी कहानी बताता है कि वो चाय की दुकान पर काम करने वाले से किस तरह देसी डाइवर आगे चलकर वाइट टाइगर बना ∣ जो गांव से निकलकर कहीं दूर जाना चाहत है अपने सपनों की उड़ान भरना चाहता है ∣ जो आगे चलकर  एक ऐसे स्थान पर खड़ा होता है ∣  जहां एक तरफ कुंआ दूसरी तरफ खाई है ∣ 

इस उपन्यास को पढ़ने का कारण ये भी है जब हम इसके कुछ पन्नों को पढ़ते हैं ∣ तब उस डाइवर की कहानी के जरिए बहुत से ऐसे रहस्मयी किस्से सुनते हैं ∣ जो कहीं न कहीं हमारे देश का सच है जिसे हम केवल नजर अंदाज कर सकते हैं ∣ किन्तु हम कतई भी इसे झुठला नहीं सकते हैं ∣ 
जहां एक ओर इस उपन्यास में शहर की हवा का जिक्र किया गया है∣ वहीं गाँव की उस बदसूरती पर इस उपन्यास ने अपनी कलाम चलायी है ∣ जो कहीं न कहीं हमारे गाँव एक सच है ∣

अगर हम कुछ नया और सस्पेंस भर पढ़ने का सोच रहे है तो ये उपन्यास बहुत ही सही चयन होगा  ∣

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..