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Showing posts from June 5, 2020

कबीर

"शब्द सम्हारे बोलिए शब्द के न होत  हाथ  पावं एक शब्द औषधि का काम करे तो एक शब्द करे घाव" जिसका अर्थ इस तरह से  है कि शब्द को उपयोग बहुत सोच समझ करना चाहिए एक शब्द व्यक्ति के लिए दवा का काम करता है तो एक शब्द ऐसा घाव करता है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता. हिन्दी साहित्य  भक्तिकाल को   धारा में बांटा  गया था जिसमें निर्गुण और सगुण धारा थी निगु॔ण धारा में वो लोग जो मूर्ति पूजा का विरोध करते थे निराकार बाह्यम की उपासना करते  थे  इसमें दो शाखाएँ थी- जिसमें 1.ज्ञानमार्गी शाखा *जिसके प्रतिनिधि कवि ' कबीर दास' थे २.प्रेममार्गी शाखा जिसके प्रतिनिधि कवि मालिक मोहम्मद जायसी है जिनकी रचना पदूमावत  है. "कबीर की लेखनी से एक लेखक बहुत कुछ सीख सकता है जैसे अपनी बातों में सत्य को ऐसे रखना जो किसी को बुरी भी न लगे और बात कह दी जाए".

पर्यावरण

" हमारे चारों ओर से घेरे हुए आवरण को पर्यावरण कहते हैं " पर्यावरण को आज हम इतनी अहमियत नहीं देते केवल एक दिन दिखावे के तौर पर पेड़ लगा देते हैं फिर न तो अगले दिन उस पेड़ की खबर लेते हैं नहीं अपने आस पास के वातावरण की. जैसे जैसे हम विकास करते जा  रहे हैं वैसे वैसे पेड़ो को काटा जा रहा है वनों की संख्या कम होती जा रही है जैसे हमें उसके लाभ तो पता ही नहीं है कि वनों के कारण वर्षा होती है, वनों से सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है, सौगोन और इमारती  लकड़ी की कीमत तो हम जैसे भूल ही गए हो. यू तो मध्यप्रदेश में वनों की संख्या अधिक  है जैव विविधता उसकी अधिक है लेकिन अब वो कम होती नजर आ रही है केवल इसका कारण आधुनिकता का प्रवेश होना है. आज वर्तमान समय में तो मुझें गाँव इस चीज में हम से  समझदार लगते है जहाँ लोगों से ज्यादा पेड़ पौधों की संख्या रहती है जब भी जाओं तो एक अलग तरह का सुकून मिलता है .  आज इस कोरोना वायरस ने हमें कुछ दिनों के लिए जब घर पर बैठया  तो प्रकृति  ने एक बार फिर चैन की सांस ली और अब वो पहले से ज्यादा साफ  सुथरी हो गयी है कुछ वर्षों ...