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Showing posts from May 15, 2025

corporate life poem in hindi

अर्ज किया है सनम तेरी कसम  कॉरेपारेट जॉब में नहीं है कोई दम सैलरी के नाम में पैसे को होती मुंह दिखाई महीना खत्म होते ही अच्छे अच्छे की लग जाती है भाई चाहे सैलरी कितनी भी हो खर्च के आगे वो भी पड़ जाती कम है भाई सोचा था नौकरी करके शौक पूरे होगे पर अब तो घर का रेंट भी दूसरों से लेकर देना पड़ रहा है हम से अच्छे तो मजदूर है जिन्हें हर दिन दिहाड़ी के नाम पैसे तो मिलता है भाई।