भाषा वो माध्यम जिसके जरिए व्यक्ति अपने विचारों का आदान प्रदान करता है। जब एक बच्चा इस दुनिया में कदम रखता है तब वो सब पहले जिस भाषा को बोलता है वो उसकी 'मातृभाषा' होती है । इस भाषा के जरिए न सिर्फ वो संवाद करता है बल्कि अपने सर्जन के कौशल को भी वो बढ़ाता है। जब बात मातृभाषा के उन्नति की आती है। तब हिन्दी साहित्य के जनक भारतेन्दु हरिश्चंद्र का जिक्र करना जरूरी हो जाता है जिनके अनुसार निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटन न होय के सूल'। अर्थात मातृभाषा की उन्नति के बिना किसी भी समाज की उन्नति नहीं हो सकती है बिना भाषा के ज्ञान के व्यक्ति को अपने मन की पीड़ा को दूर करना मुश्किल होता है। भारतेन्दु ने भाषा का उपयोग लोगों में चेतना जाग्रत करने के लिए किया था। इसमें उनका प्रसिद्ध नाटक ' अंधेरी नगरी चौपट राजा ' को कैसे भूला जा सकता है। जो आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है ∣ जहां कालिदास की रचनाओं में शकुन्तला हो या विक्रमादित्य का नाटक वो मूल रूप से संस्कृत भाषा में लिखा गय़ा था। वहीं गोस्वामी तुलसीदास के द्वारा...
वो बात जो जरूरी है