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Showing posts from September 10, 2020

आत्महत्या रोकथाम दिवस

आत्महत्या एक ऐसा शब्द जो किसी व्यक्ति की जिंदगी शुरू होने से पहले ही उसे खत्म कर देता है. यू तो भारत के संविधान में अनुच्छेद 21 में व्यक्ति क़ो जीने का अधिकार दिया है जिसमें उसकी गरिमा, गोपनीयता भी है. इसके विपरीत नीदरलैंड व्यक्ति को आत्महत्या का अधिकार देता है. यू तो आजकल सुसाइड शब्द मीडिया की सुर्खियों में रहा है .  किन्तु हमें ये समझना आज जरूरी है कि आखिर क्या वो कारण है जिसके चलते व्यक्ति आत्महत्या करने को विवश हो जाता है. जिसके क ई कारण में एक कारण उसके भविष्य के प्रति उदासीनता है तो दूसरा अपने लक्ष्य को न प्राप्त कर पाने का खेद. खेद जो व्यक्ति को किसी न किसी चीज को न प्राप्त कर पाने के कारण होता है. जैसे किसी को डाक्टर बनना था लेकिन वो कुछ और कर रहा है . आज समकालीन समय में आप अपने आस पास देखेगें तो आपको हजार नकरात्मक चीजों के सौ सकरात्मक चीजें भी दिखेगी ये आप पर निर्भर करेगा कि आपका नजरिया कितना व्यापक है और आप अपनी परेशानी से किस तरह से लड़ते हैं "कलाम अपनी आत्मकथा अग्नि की उड़ान में कहते हैं आज के युवा को जीवन - शैली को स्वपराजय की ओर ले जाने वाले इन रास्तों ...

ये दुनिया अगर

   'कहते हैं कि जीना मुश्किल होता है मरने से' जिसका अर्थ आप सब स्पष्ट तौर पर समझते होगें .   आज इस सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के चलते  लोगों के पास वो धैर्य और ताकत नहीं है जो लोगों को ये सिखा सके कि वो अपनी वास्तविक    जिंदगी को कैसे    जिए  आज सोशल मीडिया उसे एक दूसरी ही दुनिया में ले जा रही है जहाँ जाना तो आसान होता है लेकिन निकलना और भी मुश्किल. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि आप दो लोगों की तुलना करे एक जो सोशल मीडिया का लगातार उपयोग करता हैं तो दूसरा जो कम से कम मीडिया का उपयोग करता हैं तो आप पाएंगे कि  दूसरा व्यक्ति पहले की तुलना में ज्यादा खुश और जीवन जीने में सकरात्मक है. मैं ये तो बिल्कुल भी नहीं कहती हूँ कि सोशल मीडिया का उपयोग न करें लेकिन जिस तरह टीवी देखते वक्त रिमोट आपके हाथ में होता है जो आप को सही लगता है आप वो देखते हैं ठीक उसी तरह अपने फोन का उपयोग एक रिमोट की तरह करे .  " आज समकालीन समय में लोगों की आत्महत्या एक कारण ये भी है कि वो मेहनत कम और सपने में ज्यादा जीने लगे हैं   इसे हम केवल अपने एक स...