ये दुनिया अगर

  

'कहते हैं कि जीना मुश्किल होता है मरने से'

जिसका अर्थ आप सब स्पष्ट तौर पर समझते होगें . 

 आज इस सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के चलते  लोगों के पास वो धैर्य और ताकत नहीं है जो लोगों को ये सिखा सके कि वो अपनी वास्तविक    जिंदगी को कैसे    जिए  आज सोशल मीडिया उसे एक दूसरी ही दुनिया में ले जा रही है जहाँ जाना तो आसान होता है लेकिन निकलना और भी मुश्किल.

इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि आप दो लोगों की तुलना करे एक जो सोशल मीडिया का लगातार उपयोग करता हैं तो दूसरा जो कम से कम मीडिया का उपयोग करता हैं तो आप पाएंगे कि 

दूसरा व्यक्ति पहले की तुलना में ज्यादा खुश और जीवन जीने में सकरात्मक है.

मैं ये तो बिल्कुल भी नहीं कहती हूँ कि सोशल मीडिया का उपयोग न करें लेकिन जिस तरह टीवी देखते वक्त रिमोट आपके हाथ में होता है जो आप को सही लगता है आप वो देखते हैं ठीक उसी तरह अपने फोन का उपयोग एक रिमोट की तरह करे . 

" आज समकालीन समय में लोगों की आत्महत्या एक कारण ये भी है कि वो मेहनत कम और सपने में ज्यादा जीने लगे हैं  

इसे हम केवल अपने एक सपने की तरह देख सकते हैं आज हम से ज्यादा लोग एक काल्पनिक दुनिया में जी रहे हैं.

हम  सब को इस काल्पनिक जीवन से निकलकर वास्तविक दुनिया में आना होगा"हम

 जिसकी वास्तविकता ये है कि यहाँ मुफ्त में कुछ नहीं मिलता जहाँ करने से ही सबकुछ मिलता है जहाँ हर दूसरा व्यक्ति आपकी जगह लेने को खड़ा है 

ये दुनिया अगर 

कहती है की तुम कुछ नहीं 

तो तुम क्या सच में कुछ नहीं , 

पूछों खुद से ये सवाल की क्या तुम सच में कुछ नहीं 

तुम वो हो जो हर मुश्किल से लड़ने की ताकत रखता है

गिरकर उठने की काबिलियत रखता है.

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