दिल बेचारा मूवी मुख्य रूप से जीने का तारीक बताती है और साथ ही सीखाती है कि सबकी जिंदगी में मुश्किलें होती है किसी की थोड़ी त़ो किसी की ज्यादा होती है किन्तु उसमें भी कुछ लोग होते हैं जो तब भी हंस रहे होते हैं. हमारे चारों तरफ जब हम दूसरे को देखते हैं तो हमें लगता है कि हमारे ही जीवन में ही परेशानी है लेकिन जब हम अपने सामने वाले की परेशानी को जानते हैं तब हमें मालूम चलता है कि असली परेशानी आखिर किस के पास है. इस मूवी में आनंद फिल्म का वो डायलॉग बिल्कुल सूट करता है कि 'जिदंगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं'. आज भले ही सुशांत सिंह राजपूत हमारे बीच में नहीं है लेकिन उसके संघर्ष के चर्चे हम सब के बीच है मैं ये नहीं कहती कि संघर्ष केवल मध्यम वर्ग ही करते हैं किन्तु ये सच्चाई भी हमें नहीं भूलनी चाहिए कि आज भी हमारे देश में बहुत से ऐसे लोग है जिनका "संघर्ष शून्य से शिखर" तक का रहा है ** दोस्तों मरना सबको एक दिन है अंतर केवल इतना है कि कोई पहले जायगा तो कोई बाद में किन्तु उसमें वो ऐसा क्या करके जाता है जो उसे दूसरे से...
वो बात जो जरूरी है