एक इंसान के निर्माण के लिए जरूरी होता है उसके जीवन का संघर्ष ज़ो केवल उसकी सफलता में ही नहीं बल्कि उसकी असफलता में भी होता है .
इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि जब व्यक्ति किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कोई काम करता है तो व़ो उसे लगातार करता जाता है जिसमें उसे कई बार असफलता भी मिलती है .लेकिन वो लगातार अपने काम को करता चला जाता है .
व्यक्ति का निर्माण केवल अच्छी परिस्थितियों में नहीं बल्कि बुरी परिस्थितियों में भी होता है जहाँ उसको जीवन जीने की नयी सीख मिलती है.
इसलिए तो कहा जाता है
'जिंदगी की यही रीत है
हार के बाद ही जीत है'.

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