एक तरफ आज लोग अधिक पैसा कमाने के लिए 9 घंटे काम कर रहे है। वहीं दूसरी तरफ एक निश्चित नौकारी की चाह में देश की आधी युवा पीढ़ी सरकारी नौकारी की तैयारी में लगी हुई है। जो सही है या गलत ये वाद विवाद का प्रश्न हो सकता है। किन्तु इतना तो निश्चित है कि आज भी हमारे देश में अदृश्य बेरोजगार इस सरकारी नौकारी की तैयारी में अपनी जवानी लगा रहे है । जिनमें से बहुत थोड़े युवा का सिलेक्शन देश के किसी भी सरकारी नौकारी में होना है। इसी तैयारी और संघर्ष को 12 फेल मूवी हमें दिखाती है। जो देश के सबसे बड़े एग्जाम यूपीएससी से हमारा परिचय करती है। जो एक सच्ची घटना पर आधारित है। जिसमें हम चम्बल के मनोज नामक युवक की कहानी को देखते है। जो किसी तरह से 12 वीं पास करना चाहता है। ऐसे में जब एक हिन्दी मीडियम का छात्र अंग्रेजी माध्यम वालों के बीच जाता है तो उसकी दशा और दिशा किस तरफ जाती है ये मूवी की कहानी में हम देखते है। जो यूपीएससी की रेखा कैसे पार कर पाता है। ये मूवी में देखना काफी दिलचस्प होता है। ये मूवी हमें सफलता और असफलता के फर्क को बताती है। जहां अक्सर लाख परेशान...
वो बात जो जरूरी है