जिद्दी उपन्यास में मुख्य रूप से दो पात्र है पूरन और आशा। इनके इर्द गिर्द घूमता ये पूरा उपन्यास है । जो प्रेम के बीच आ रही सामाजिक संरचना और आर्थिक विषमता को दिखाता है। इसके चलते सबसे ज्यादा जो पीड़ा सहती वो स्त्री दिखाई देती है। जो दूसरों के हाथों की कठपुतली बना दी जाती है ∣ जिद्दी उपन्यास के शुरू होते हम पाते है कि एक राजा अनुसूचित जाति और जनजाति लोगों का बड़ा पक्षधर बना बैठा है। जो अपने कामों के जरिए लोगों को ये बताने की कोशिश करता है कि उससे ज्यादा तो उन लोगों का अच्छा सोचने वाला कोई नहीं है। कहानी आगे बढ़ती है और उस राजा के छोटे बेटे पूरन को जब घर की नौकारानी आशा से प्रेम हो जाता है । जो अपने स्वभाव का बड़ा जिद्दी इंसान है उसे जो चीज चाहिए होती है ∣ उसे वो ले ही लेता है। ऐसे में इस उपन्यास को पढ़ना आगे और ज्यादा दिलचस्पा भर हो जाता है कि पूरन किस तरह से एक तरफ अपने प्यार के लिए पूरे समाज से दो दो हाथ कर लेने को आतुर हो जाता है । तो दूसरी तरफ वो अपने पिता के सच को लोगों के सामने ले आने की कोशिश करता है। जो केवल बाहर से नरम बनाने की कोशिश करता है। इस उपन...
वो बात जो जरूरी है