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स्त्री की वेदना को करीब से दिखाता है इस्मत चुगताई का उपन्यास जिद्दी



जिद्दी उपन्यास में मुख्य रूप से दो पात्र है पूरन और आशा। इनके इर्द गिर्द घूमता ये  पूरा उपन्यास है । जो प्रेम के बीच आ रही सामाजिक संरचना और आर्थिक विषमता को दिखाता है। इसके चलते सबसे ज्यादा जो पीड़ा सहती वो स्त्री दिखाई देती है। जो दूसरों के हाथों की कठपुतली बना दी जाती है ∣
जिद्दी उपन्यास के शुरू होते हम पाते है कि एक राजा अनुसूचित जाति और जनजाति लोगों का बड़ा पक्षधर बना बैठा है। जो अपने कामों के जरिए लोगों को ये बताने की कोशिश करता है कि उससे ज्यादा तो उन लोगों का अच्छा सोचने वाला कोई  नहीं है। 
कहानी आगे बढ़ती है और उस राजा के छोटे बेटे पूरन को जब घर की नौकारानी आशा से प्रेम हो जाता है । जो अपने स्वभाव का बड़ा जिद्दी इंसान है उसे जो चीज चाहिए होती है ∣ उसे वो ले ही लेता है। 
ऐसे में इस उपन्यास को पढ़ना आगे और ज्यादा दिलचस्पा भर हो जाता है कि पूरन किस तरह से एक तरफ अपने प्यार के लिए पूरे समाज से दो दो हाथ कर लेने को आतुर हो जाता है ।  तो दूसरी तरफ वो अपने पिता के सच को लोगों के सामने ले आने की कोशिश करता है। जो केवल बाहर से नरम बनाने की कोशिश करता है।
इस उपन्यास की दूसरी कड़ी आशा जो समय के भंवर में इस तरह से  फंस चुकी है कि वो आगे क्या करें क्या न करेें  उसके वंश में ही नहीं है ।
 दूसरी तरफ जब पूरन उससे इश्क़ लड़ा बैठाता है ऐसे मैं वो कैसे खुद को इन सब से दूर कर पाती है ये देखना बड़ा ही दिलचस्पा होता है।

जो हम इस उपन्यास के आगे जानते है ∣ प्रेम के आकर्षण के बीच उसके दूसरे अर्थ को जानते है जो हमारे लिए एक बुरे सपने से ज्यादा और कुछ नहीं होता है।
कुछ मिलकर ये उपन्यास  जहां एक तरफ हमें हमारे सामाजिक परिवेश से  परिचय कर रहा होता है। तो वहीं दूसरी तरफ हमेशा अपने सुख को बलिदान करने वाली नारी जाति को दिखा रहा होता है जिसके साथ हमेशा से गलत होता आया है। अच्छा हो या बुरा सबका दोषी अक्सर उसे ही ठहराया जाता है।
इस उपन्यास के कुल दो भाग है एक भाग मैं उपन्यास के सभी किरदारों को बताया गया है तो वहीं उपन्यास के दूसरे भाग में पूरन और आशा के इजहार और उसके परिणति को हमारे सामने बड़े ही मार्मिक रूप में प्रकट किया गया है।
ये उपन्यास अंतरजातीय विवाह, सामाजिक दबाव, और आर्थिक असमानता के साथ विवाह को लेकर समाज में बने  परिवेश को काफी नजदीक से दिखाता है। इसकी भाषा काफी सरल और सहज है। इसमें हिन्दुस्तानी भाषा का प्रयोग किया गया है जिसमें हिन्दी और उर्दू भाषा का सुंदर समावेश है।
इस उपन्यास का पढ़ने का कारण प्रेम के पीछे छुपे उस सच और दर्द को जानना है जिसकी पीड़ा अक्सर इंसान को पागल कर देती है। 

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हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..