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Showing posts from May 14, 2024

Save Environment:अगर तुम अब भी न समझों तो

Save Environment: कितनी अजीब बात है न जिसे सब्जेक्ट समझ हम बचपन से पढ़ते आ रहे है। उसे सब्जेक्ट के अलावा हम कुछ नहीं समझ पाये। कि ' अगर ये पर्यावरण को कुछ भी हुआ, तो हमारा अस्तित्व भी शेष न बचेगा'।  जो सबसे जरूरी था उसे छोड़ सबकुछ पढ़ते चले गए। आज हालात ये है कि अपने आस पास के वातावरण को बचा न पाये हम।  जहां हमारे अपने बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ा है। उनके लिए न स्वच्छ जल , न स्वच्छ वातावरण और न  स्वच्छ हवा बची है। जिसके जिम्मेदार केवल हम और आप है। जो सबकुछ पाने की लालसा में बहुत कुछ कुचल आगे चल पड़े। विकास के नाम पर सड़क तो बनी पर पेड़ काटते चले गए। वो छाव जो सबको रास आती थी। सबके दिल पर राज करती थी। गर्मी में जिसकी छाव लेते थे। बरसात में जिसकी आड़ जा स्कूल जाएं करते थे। वो आधुनिकता के मोड़ में कही खो सा गयी। जिस पेड़ के छाव ले स्कूल से घर का रास्ता तय किया। आज जब उस गली मुड़े तब स्कूल, अलावा कुछ और  शेष न बचा। जिस छाव को लेकर हमने अपनी यादें गाढ़ी। उसका न कोई अवशेष बचा।  ये सिर्फ हमारी एक छोटी सी स्मृति है। अफसोस इस बात का सम्बन्ध आज   हर पेड़ से ...