Save Environment:अगर तुम अब भी न समझों तो



Save Environment: कितनी अजीब बात है न जिसे सब्जेक्ट समझ हम बचपन से पढ़ते आ रहे है। उसे सब्जेक्ट के अलावा हम कुछ नहीं समझ पाये। कि 'अगर ये पर्यावरण को कुछ भी हुआ, तो हमारा अस्तित्व भी शेष न बचेगा'। जो सबसे जरूरी था उसे छोड़ सबकुछ पढ़ते चले गए। आज हालात ये है कि अपने आस पास के वातावरण को बचा न पाये हम। 

जहां हमारे अपने बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ा है। उनके लिए न स्वच्छ जल , न स्वच्छ वातावरण और न  स्वच्छ हवा बची है। जिसके जिम्मेदार केवल हम और आप है। जो सबकुछ पाने की लालसा में बहुत कुछ कुचल आगे चल पड़े। विकास के नाम पर सड़क तो बनी पर पेड़ काटते चले गए।


वो छाव जो सबको रास आती थी। सबके दिल पर राज करती थी। गर्मी में जिसकी छाव लेते थे। बरसात में जिसकी आड़ जा स्कूल जाएं करते थे। वो आधुनिकता के मोड़ में कही खो सा गयी। जिस पेड़ के छाव ले स्कूल से घर का रास्ता तय किया। आज जब उस गली मुड़े तब स्कूल, अलावा कुछ और  शेष न बचा। जिस छाव को लेकर हमने अपनी यादें गाढ़ी। उसका न कोई अवशेष बचा। 

ये सिर्फ हमारी एक छोटी सी स्मृति है। अफसोस इस बात का सम्बन्ध आज   हर पेड़ से है। जिसे लगाये किसी ने बड़े चाव से, पर मॉर्डन दिखाने के चक्कर में सबकुछ उजाड़ गए हम। 

काश उसे सिर्फ सब्जेक्ट न समझा होता

कितनी अफसोस बात है जिस EVS को सब्जेक्ट समझ। हमने बचपन से पढ़ा। आगे चलकर उसका महत्व ही हमने नहीं समझा। सिर्फ मार्क्स के लिए उसे पढ़ते आगे चले गए। Environment क्या है उसे जानकर भी हम अनजान बन गए। जहां सबकुछ सिलेबस से पढ़ा और जाना। पर उस पर्यावरण को हम समय के साथ भूल गए। 


सवाल जैसे पूछती हम से

Earth जिसे हमने मां माना। पर उसके एहसानों को हमने कहां जाना। अपनी शान और शौकात के लिए सबकुछ उजाड़, हमने उसका कत्लेआम कर, चैन से नींद लेनी जानी।

आज जब सबकुछ बिगाड़ रहा है। हाथ में कुछ भी शेष नहीं बच रहा है। जहां प्रकृति का कहर छाया है। जहां प्रलय का भयवाह रूप आया है। वहां अब हम सब शांत देख रहे है क्योंकि ये तूफान हमारे घर नहीं आया है। 


पर शायद हम ये भूल गए। ये तूफान की आंधी है। जो अपना बदला लेती है। मां तो माफ भी कर देती है पर प्रकृति सबका हिसाब लेती है। उसके बावजूद हम न समझें। तो बहुत पछताओंगे। जब प्रलय आएगी, तब हम भी शेष न बचेगें। 


सम्भाल जाओं वरना 
तुम भी शेष न बचोगें
जिन पेड़ो को कांट
आलीशान घर में हो तुम
उन पेड़ो के अस्तित्व को बचाने 
की लड़ाई में आगे बढ़ जाओं तुम
रूक जरा,
अपनी आदतों को सुधारों
पॉलीथीन जो विनाश का कारण 
बन चुकी है
उसके उपयोग को सीमित करों
पानी बचाओं 
वरना कल तुम प्यास बुझाने के 
लिए तरास जाओंगे
जितनी जरूरत है 
उतना ही उपयोग करों
अपनी जरूरतें सीमित
और अपनी जीवन की शैली को सुधार लो
मॉर्डन होने के चक्कर में  
विनाश को तुम मत बुलाओं
वरना इसके जिम्मेदार केवल 
और केवल तुम होगें।

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