बहुत देर में ये मालूम चला आगे बढ़ने की ललक में बहुत कुछ हम ऐसा पीछे छोड़ आये जिसे चाहकर भी हम अब पा नहीं सकते हैं ∣ सबका हिसाब लगते रहे पर खुद का हिसाब नहीं लगा पाएं बहुत पढ़े पहाड़े किन्तु नाईया न पार लगा पाएं एक एक कर कम होती गयी चीजें जिंदगी का हिसाब न हम लग पाये बहुत देर में मालूम चल सबकुछ पाने की एवज में बहुत कुछ अपना हम खो सा गये।
वो बात जो जरूरी है