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Showing posts from October 16, 2020

World Food day

आज विश्व खाद्य दिवस से है जो कि 150 से भी अधिक देशों के द्वारा मनाया जाता है इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को कुपोषण, भुखमरी जैसी समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करना है साथ ही इसे कम करने हेतु प्रयास करना है. इस कोरोना काल में सबसे ज्यादा गरीब देश खाद्यान की समस्या से जूझ रहे हैं जिसका एक कारण पैसे का अभाव है. आज बहुत सारे बच्चे कुपोषण का शिकार है तो वही भुखमरी से भी लोग परेशान है हम सब की एक नागरिक होने के नाते ये जिम्मेदारी बनती है कि हम लोगो को कुछ दे सके उनका पेट भर सके इसके लिए हम पहले स्वयं सक्षम हो और फिर दूसरे को सक्षम करें. भारत में जब अकाल पड़ा था तब हिन्दी के प्रसिद्ध कवि नागार्जुन ने अकाल पर एक कविता लिखी थी  जिसकी चंद पंक्ति इस तरह से है  "कई दिनों तक चूल्हा रोया चक्की रही उदास क ई दिनों तक कानी कुतिया रही उसके पास क ई दिनों तक चूहो की हालत रही गस्त  दाने आए घर के अंदर आए  घुआ उठा घर के अंदर  क ई दिनों के बाद."  आज मौजूदा समय में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए हम सब की जिम्मेदारी बनती है कि हम व्यर्थ में खाद्य का दुरूपयोग न करे जितनी भूख...

विचार करना जरूरी है

आज हम सब को ये सोचना जरूरी है कि हम आखिर में किस दिशा में जा रहे हैं और हम क्या करने की सोच रहे हैं दूसरे की देखा- सिखी में हम काम एक दो दिन कर सकते हैं किन्तु अगर पूरी जिंदगी हमें ये कहा जाऐं तो हम इसे नहीं कर पाएगे क्यों कि न इसमें हमारा जुनून होगा न कोई दिलचस्पी. आज इस भागदौड़ भरी जिंदगी में एक प्रतिशत से भी कम लोग है जो अपनी तरह से काम करना चाहते वो दूसरे की नकल करके नहीं बल्कि खुद के तौर तरीके से अपना काम करना चाहते हैं.  वैसे तो हम सब लोगों के कोई न कोई आदर्श व्यक्ति होते हैं जिनके आदर्श पर हम चलना चाहते हैं किन्तु हम चल नहीं पाते. आज हम सब को ये निर्णय लेना होगा कि हम किस राह पर चल रहे हैं और जो काम हम कर रहे हैं वो हमारे द्वारा ही सोचा गया था न किसी दूसरे व्यक्ति की देखा सिखी तो हम वो काम नहीं कर रहे हैं क्योंकि आज आवश्यकता संख्या से ज्यादा गुणवत्ता की है .