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World Food day


आज विश्व खाद्य दिवस से है जो कि 150 से भी अधिक देशों के द्वारा मनाया जाता है इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को कुपोषण, भुखमरी जैसी समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करना है साथ ही इसे कम करने हेतु प्रयास करना है.

इस कोरोना काल में सबसे ज्यादा गरीब देश खाद्यान की समस्या से जूझ रहे हैं जिसका एक कारण पैसे का अभाव है.

आज बहुत सारे बच्चे कुपोषण का शिकार है तो वही भुखमरी से भी लोग परेशान है हम सब की एक नागरिक होने के नाते ये जिम्मेदारी बनती है कि हम लोगो को कुछ दे सके उनका पेट भर सके इसके लिए हम पहले स्वयं सक्षम हो और फिर दूसरे को सक्षम करें.

भारत में जब अकाल पड़ा था तब हिन्दी के प्रसिद्ध कवि नागार्जुन ने अकाल पर एक कविता लिखी थी 

जिसकी चंद पंक्ति इस तरह से है 

"कई दिनों तक चूल्हा रोया

चक्की रही उदास

क ई दिनों तक कानी कुतिया रही उसके पास

क ई दिनों तक चूहो की हालत रही गस्त 

दाने आए घर के अंदर आए 

घुआ उठा घर के अंदर 

क ई दिनों के बाद." 

आज मौजूदा समय में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए हम सब की जिम्मेदारी बनती है कि हम व्यर्थ में खाद्य का दुरूपयोग न करे जितनी भूख हो उतना ही ले.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..