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Showing posts from March 29, 2024

आधी आबादी का सच

इसे समय की विडंबना कहे या हमारे समाज का सच। लेकिन आज यहीं सच है कि देश में जितना डिग्री ली जा रही है उसके आधे भी रोजगार नहीं है।  जहां एक सीट के लिए उससे दुगने उम्मीदवार खड़े हुए हैं । जहां कौशल विकास योजना तो आयी पर युवाओं को वो कौशल देना भूल गयी।  अगर हम देश में पेशेवर डिग्री को छोड़ दे तो हमारे देश में रोजगार के लिए न युवाओं को कोई कौशल दिया गया है। सिवाए सरकारी नौकरी के झुनझुने के जो आज हर तीसरे युवा का सपना है ।  फिर चाहे सरकारी नौकरी मिले या न मिले लेकिन सरकारी नौकरी का लालच तो युवा को दिया ही जा रहा है।  फिर इसके चलते वो ओवर ऐज हो, देश के लिए एक तरह के आश्रित आधार क्यों न बन‌ जाएं। लेकिन इससे न‌ हमारे देश के नेताओं को फर्क पड़ता है न‍ ही हम लोगों। जहां अब हमने नियति मान खुद को‌ ही धोखे में रखना शुरू कर दिया है कि देर सबेर हमें नौकरी मिल ही जाएगी। फिर क्या हुआ तब तक हम उस नौकरी के लायक ही नहीं रहे।