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आधी आबादी का सच



इसे समय की विडंबना कहे या हमारे समाज का सच। लेकिन आज यहीं सच है कि देश में जितना डिग्री ली जा रही है
उसके आधे भी रोजगार नहीं है। 
जहां एक सीट के लिए उससे दुगने उम्मीदवार खड़े हुए हैं । जहां कौशल विकास योजना तो आयी पर युवाओं को वो कौशल देना भूल गयी। 
अगर हम देश में पेशेवर डिग्री को छोड़ दे तो हमारे देश में रोजगार के लिए न युवाओं को कोई कौशल दिया गया है। सिवाए सरकारी नौकरी के झुनझुने के जो आज हर तीसरे युवा का सपना है । 
फिर चाहे सरकारी नौकरी मिले या न मिले लेकिन सरकारी नौकरी का लालच तो युवा को दिया ही जा रहा है। 
फिर इसके चलते वो ओवर ऐज हो, देश के लिए एक तरह के आश्रित आधार क्यों न बन‌ जाएं। लेकिन इससे न‌ हमारे देश के नेताओं को फर्क पड़ता है न‍ ही हम लोगों। जहां अब हमने नियति मान खुद को‌ ही धोखे में रखना शुरू कर दिया है कि देर सबेर हमें नौकरी मिल ही जाएगी। फिर क्या हुआ तब तक हम उस नौकरी के लायक ही नहीं रहे। 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..