एक बच्चा जब चलना सीखता है तो उसे किसी व्यक्ति के सहारे की जरूरत होती है जो उसे गिरने से बचा सके और आगे चलने की ओर उसे प्रेरणा दे सके धीरे -धीरे वहीं बच्चा जब बड़ा होने लगता है और एक पेड़ की भांति वो बढ़ते चला जाता है इसे बेखबर की दुनिया में आगे निकलती जा रही है देश में मंहगाई बढ़ती जाती है राजनीति का मुद्दा बदलता जाता है राजनेता की नियत बदल जाती है तब वो बच्चा आंखों सपने लिए आगे बढ़ता चला जाता है और समय निकलता जाता है धीरे - धीरे जब उस बालक का नए - न ए लोगों से परिचय होता है तब वो जानता है कि ये दुनिया क्या है इसमें रहने वाले लोग कौन है वो बच्चा अपनी आखों में सपने गढ़ने लगता हैं कि वो क्या बनना चाहता है और वो खुद को उस की तरह देखने लगता है ? समय निकलता है और एक समय ऐसा आता है जब उस बच्चे का परिचय खुद से होता है जहाँ उसे मालूम चलता है जिस सपने को पूरा करने के लिए वो आगे बढ़ रहा है यकीनन उस चीज पाने के लिए उसे धैर्य रखना होगा साथ ही उसे कर्मयोगी होना होगा तब ही वो अपने ख्वाब को पूरा कर पाएगा और वो बच्चा बच्चे से कब एक बालक -बालि...
वो बात जो जरूरी है