Skip to main content

Posts

Showing posts from April 2, 2021

उत्साह

 हिन्दी साहित्य के निबंधकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल का एक निबंध उत्साह अभी हाल ही में मैंने पढ़ा जो कि चितामणि के भाग 1 का एक अंश है  जिसका नाम था 'उत्साह ' जिस पर आचार्य रामचन्द्र शुक्ल कहते हैं" कि उत्साह के साथ व्यक्ति सभी कठिन काम को कर लेता जबकि इसके विपरीत अगर कोई व्यक्ति बिना उत्साह के जीवन के भयंकर कष्ट झेलता है और तब भी अपने काम को करता जाता है तब को उत्साह नहीं अपितु साहस कहा जाता है" जिस पर वो आगे कहते हैं कि जब व्यक्ति किसी साध्य को जिसका अर्थ है' (सम्भव कार्य का पूरा कर लेना ')कर लेता है तो वो आगे भी उसी कार्य को उत्साह के साथ करते जाता है जबकि इसके विपरीत अगर कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करने की सोचता है जिसमें उसे मालूम होता है कि वो उसे पूरा नहीं कर पाएगा वो असाध्य है जिसका अर्थ है( कि वो कार्य असम्भव है )तो भी अगर वो आगे कार्य जारी रखता है तो उसे उत्साह के साथ नहीं अपितु साहस के साथ करता है आगे शुक्ल निबंध में बताते हैं कि अगर व्यक्ति किसी कार्य को लगातार करता जाता है किसी विशेष लक्ष्य को साधने के लिए तो ऐसे में भले उस व्यक्ति के सभी कार्य पूर...

इच्छा जाहिर न कर पाने का दर्द

आज एक सीरियल देखते समय मन में एक प्रश्न कौधा की सच में क्या आज भी  ऐसा ही होता है ?  एक अदालत में जब पेशी होती है तो अदालत में सबूत के तौर पर पेश होने वाले व्यक्ति को  अदालत के सामने ये विद्या की कसम खानी  होती है 'कि वो जो कहेगा सच कहेगा, सच के सिवाय कुछ नहीं कहेगा  किन्तु  इसके विपरीत  अक्सर जीवन में  किसी  बेगुनाह व्यक्ति को सजा उसके सच कहने के कारण दे दी जाती है वहीं दूसरी ओर किसी व्यक्ति को सजा का पात्र केवल इसलिए बनना पड़ता है कि उसने  किसी मुद्दे पर तर्क के साथ उसे दूसरे ढंग से सुलझाने की बात कही  उसने अपनी इच्छा जाहिर जो की सामने वाले को रास न आयी  कितना अजीब है न अक्सर व्यक्ति अपनी इच्छा जाहिर करने के कारण दंड का पात्र बन जाता है  और हम सब के सामने एक सवाल छोड़ जाता है कि क्या अपनी इच्छा जाहिर करना गुनाह है?