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Showing posts from December 23, 2021

जैसे पूछती सवाल तुम से ये डाली

  जैसे पूछती सवाल तुम से ये डाली आखिर क्यों चुप हो  क्यों तुम कुछ बोलती नहीं क्यों हो तुम चिंताओं के घेरे में  साझ  हुई तुम अभी भी  व्याकुल हो क्यों आज   क्या नहीं है तुम में  ये जानने की जिज्ञासा  ये रात क्यों है इतनी काली बोलो न क्यों मौन हो तुम  क्या आज प्रश्न नही  तुम्हारे पास  क्यों  है  ये मुरझाया हुआ मनुष्य जिसके चारों और  है हरियाली   फिर भी लगता जैसे उपवन खाली  ∣