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Showing posts from January 31, 2021

इनको नजर अंदाज क्यों

  जिनके लिए बस में सीट से लेकर घर में प्राथमिकता कोई चीज ही नहीं यहाँ तक कि उनके रोने पर उन्हें खाना दिया जाता है जिस पर कहावत तक बनी है कि बच्चे को भी रोने पर ही दूध मिलता है .  बच्चे को भले ही हम बच्चा कहकर नजर अंदाज कर दे किन्तु वो कभी हमें नजर अंदाज नहीं करते वो इस तरह से अपने काम को करते जिस देखकर हम भी हैरान रह जाते हैं कि वो अपने काम को कितने बेहतर ढंग से करते हैं न किसी तरह का आलसी पन और न ही किसी चीज की गैर जिम्मेदारी भरी हरकत व़ो शरारत भी इतने मनमोहक ढंग से करते हैं कि उन पर चिल्लाना भी व्यर्थ लगता हैं. हम बचपन की अवस्था में अपने काम को लेकर जितना सजग रहते हैं उतने किसी उम्र में नहीं हालांकि बुढ़ापा और बचपन दोनों ही व्यक्ति को किसी न किसी पर निर्भर करने को मजबूर करता है जैसे बुढ़ापे में पेंशन का और बचपन में माँ और पिता के लाड़ प्यार का ये बात थोड़ी अलग है कि पिता से ज्यादा बच्चे माँ पर निर्भर रहते हैं किन्तु ये बात कहना गलत होगी कि वो पिता अपने बच्चों से स्नेह नहीं करते जिनकी व्यस्तता इतनी होती है कि बच्चे को रोता छोड़ ऑफिस भागने की प्राथमिकता होती है. किन्तु ऐसा नह...

𝙘𝙪𝙩 𝙣𝙤 𝙞𝙘𝙚

जिंदगी की वास्तविकताओं को जब हम गौर से देखे तो मालूम चलता है कि असल जिंदगी में हर वो इंसान महान है जो हर मुश्किल से लड़ते हुए अपने वक्त का उपयोग बड़ी शिद्दत से करता है जिसके लिए जिंदगी में कुछ करना बहुत जरूरी है जो हर वक़्त अपने सपनों को पूरा करने की लिए जी तोड़ मेहनत कर रहा है जिसे दुनिया दारी से अपने यकीन से ज्यादा मतलब नहीं जो खुद के लिए जीता है कौन उसे अच्छा कहता है बुरा उसे इसे फर्क नहीं पड़ता जिसका मकसद किसी भी हालात में अपने ख्वाब को सच करना है जिसकी ख्वाहिश बहुत कम है  आज समकालीन समय में अगर हमें कुछ करना है तो हमें कुछ 𝙞𝙙𝙞𝙤𝙢𝙨 𝙥𝙝𝙖𝙧𝙨𝙚 पर ध्यान देने की जरूरत है 𝙁𝙞𝙜𝙝𝙩 𝙩𝙤𝙤𝙩𝙝 𝙖𝙣𝙙 𝙣𝙖𝙞𝙡 जी जान से लड़ना 𝘾𝙪𝙩 𝙣𝙤 𝙞𝙘𝙚 प्रभावित  न कर पाना 𝘽𝙚 𝙤𝙪𝙩 𝙤𝙛 𝙩𝙝𝙚 𝙬𝙤𝙤𝙙𝙨 गंभीर जोखिम उठाना 𝘽𝙚𝙡𝙡 𝙩𝙝𝙚 𝙘𝙖𝙩 बड़े संकट का सामना करना.