उपन्यास किसी ऐसी कृति को पढ़कर तुम्हें ऐसा लगे कि यहाँ तुम्हारे बारें में ही कही गयी है तो उसे उपन्यास कहते हैं इस परिभाषा का ध्यान से अगर हम पढ़े तो जानेगें उपन्यास लिखने का मतलब है ऐसे पात्र को लाना है जिससे किसी भी काम करने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ती है जो क ई तरह के अंतविरोध के गुजरता हो आमतौर पर हम जब किसी भी उपन्यास या कहानी को पढ़ते हैं जब हम उसकी उपन्यास की शुरुआत करते हैं तो उसके एक से दो पेज केवल हम उसे समझने में लगते हैं कि एक लेखक क्या बताना चाहा रहा है इसके मुख्य पात्र क्या है और जब हमारा वास्ता उपन्यास के मुख्य पात्र से होता है तो हम देखते हैं कि वो जगह जगह पर कितनी परेशानी का सामना कर रहा है उसका जीवन अंतविरोध से भरा पड़ा है और जैसे जैसे हम अपने पात्र से परिचित होते चले जाते हैं हमारी उस कहानी या उपन्यास का और पढ़ने की प्यास जाग जाती है जिसे बुझाने के लिए केवल हम उसे आगे पढ़ सकते हैं भले बात जयशंकर के उपन्यास कंकाल की हो जो हमें सोचते को मजबूर कर देता है कि कोई पात्र इस हद तक पीड़ा सह सकता है तो कोई पात...
वो बात जो जरूरी है