पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद की चतुर्थी को गणेश जी का प्राकट्य हुआ था जिसे गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है ∣ गणेश प्रथम पूज्य देव माने जाते है ∣ इनके पूजन से सभी तरह के मनोरथ पूर्ण होते हैं ∣ मान्यताओं के मुताबिक, अगर गणेश का पूजन सच्चे मन से किया जाएं, तो वो अपनेभक्तों के सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं ∣ कैसे हुई थी, उत्पत्ति गणेश की ऐसा माना जाता है कि देवी पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक मूर्ति बनाकर उसमें जान डाल दी थी जिसे उन्होंने अपने पुत्र के रूप में मान्यता दी थी, जब वो स्नान करने जाती है तब वो अपने द्वारपाल के तौर पर इनकी नियुक्ति करती है किन्तु जब भगवान शिव पार्वती से मिलने के लिए आते हैं ∣ तब दोनों पिता, पुत्र में भंयकर युद्ध छिड़ जाता है ∣ जिसमें उनका मस्तक अपने पिता के प्रहार से शरीर से अलग हो जाता है ∣ तब भगवान शिव उनके मस्तक में गजानन का सिर जोड़ देते हैं ∣ तब ही से उनका नाम गणेश कहलाया ∣ क्यों होती है? प्रथम पूज्य देव के रूप में उनकी पूजा पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब देवताओं में ये प्रश्न उठा कि प्रथम पूज्य देवता किसे बनाया जाएं ? इसके लि...
वो बात जो जरूरी है